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याद

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रुषवा हो गया हूं इस ज़िन्दगी से तेरे जाने के बाद, ऐसा कौन सा लम्हा है जब न आती हो तेरी याद। इस जीवन का कोई मोल अब मुझे न लगता है, बिना तेरे बस ये जीवन यूही कटता सा है। तुम गये मेरी दुनिया ही चली गयी, तुम्हारे साथ मेरी हर मुस्कान चली गयी। हर दिन तेरी यादो से शूरु होता है, हर रात तेरी यादो से आँखे नम होती है। पहले ही अपनों से धोखा खाये बैठे थे, तुम साथ छोड़ गए हम असहाय बैठे थे। पूछने को हाल हमारा कोई जरूरी न समझता है, बस तेरी यादो से भरा दिल आँखों से बरसता है।

संघर्ष

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हर दिन नया होते ही नए संघर्ष लाता है, दिन हो पूरा फिर भी ये पूरा ना हो पाता है। उम्मीदों के पंख लगा हर कोई उड़ना चाहता है, अफसोस की बात है सबसे उड़ा ना जाता है। लाख मजबूरियों को पार कर इसमें आगे बड़ा जाता है, हो कई बार असफल लेकिन उम्मीद का साथ ना छोड़ा जाता है। ज़िन्दगी का सही माने हमें ये संघर्ष ही समझता है, हो जितना संघर्ष बड़ा सफलता में उतना ही मजा आता है। ना उम्मीद में जियो कोई साथ निभाने आयेगा, अपना संघर्ष खुद के काटे काटा जायेगा। साल बुरा है दौर बुरा है फिर भी ना हिम्मत हारी है इस संघर्ष से पार पाने की निरंतर कोशिश जारी है। नाम शिव पर मां पिता ने रखा है, हिम्मत कैसे हार जाऊ आप का उत्तराधिकरी हूं। ना टूटी हिम्मत मेरा संघर्ष जारी है। मेरा संघर्ष जारी है।।।।।।।। Written by -शिवम सिंह यादव

बचपन पापा के साथ

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जब समझ आया जीवन थोड़ा सा, पाया पापा को बना अपने लिए घोडा था। टॉफी कम्पट खूब लाते थे, प्यार से वो हम सबको खिलाते थे। मैं था सबसे छोटा सबसे दुलारा उनका, वो हमेशा कहते थे बनूँगा सहारा उनका। धीरे धीरे हम बड़े होते गए, आपके साथ ही चलते गये। यूं तो हमेशा आप साथ होते थे, हर समय नसीहत के साथ पास होते थे। कहते थे हमेशा आप सबका भला करो, अपना सब दूसरो के लिए जुदा करो। पैसा फिर कमा लिया जायेगा, अपने द्वारे से कोई खली नही जायेगा। अब समझ आया आप दिल से राजा थे पापा, आप जैसा हममे से कोई न बन पायेगा पापा। ये सौभाग्य था जो आपके साथ ये जीवन रहा है, आपके आदर्शो के साथ ही अब आगे जीवन बहा है।

ये कैसी विदाई

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ये कैसी विदाई ले ली है आपने? न मिले न ही कुछ आखिरी बात बोले हम सबसे। ना कोई गिला किया न कोई शिकवा आपने, हम सबको हमेशा के लिये जुदा किया आपने। नही है कोई मलाल मन में हम सबके, कम से कम काबिल हुए आपके साये में पल के। मुँह का गन्दा,दिल का साफ़ हर कोई आपको बोलता है, हर जानने वाले के आखो से आँसू गिरता है। कहते थे आप एक राजा जाता है तभी दूसरा आता है, क्या कहूं पापा आपके बिना ये राजपाठ सम्हाला ना जाता है। काश वापस आके आप खुद के ये सब सम्हाल लो, हम दोनों भाइयो को फिर से अपनी नसीहत के साथ फटकार लो। यू बीच सफर में बहुत जल्दी साथ छोड दिया, हम सबको रोता हुआ तनहा छोड दिया। माँ बहुत रोयी आपको उस हाल में देख के,😢 हम भी दिल से रोये आखो को भिंच के।। आप भी खुश रहो ईश्वर के चरणों में, हम दोनों भाई चलेंगे आपके दिखाये कदमो में।। ॐ शांति।। I love you papa..miss you,😭😭

आधुनिकता

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आज का दौर आधुनिक हो गया, हर कोई ज्यादा ही प्रायोगिक हो गया। हजारो दोस्त सोशली होते गए, सच्चे साथी जाने कहा खो गए।। चाँद तारो का सपना पाल बैठे है, पैरो से जमीन तक गवाये बैठे है। नया दौर नयी जनरेशन है, बड़ो की सीख भी इनकी टेंशन है। भूल बैठे है ये अपनी खुशिया, बने है सिकंदर और चाहत है सारी दुनिया।। माँ पिता जी का आशीर्वाद अब रोज कौन लेता है? अब सबकी नजरो में मॉडर्न जो बन गया बेटा है। आज का दौर आधुनिक हो गया, हर रिश्ता पैसे से तौला गया। जो जितना पैसा दे सकते है, उनसे उतना गहरा रिश्ते है। बेमतलब की यारी अब इस युग की बात नही, हमसे ये नये युग की दुनियादारी अब बर्दास्त नही। मोबाइल की लत ऐसी लगी है सबको, २ मिनट न मिले तो बीत गए हो बरसो।। ज़िन्दगी में संघर्ष अब लोग कर नही पा रहे, ज़िन्दगी को छोड़ मौत को गले लगा रहे है। आज का दौर आधुनिक हो गया है।।।।। Written by- शिवम् सिंह यादव                     (अभियंता और अधिवक्ता)

आज़ादी

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ना करो तुम शिकवा गैरों से, वो इसके हकदार नही। जब दिल ही पत्थर हो अपनों का, किसी शिकायत की वहाँ दरकार नही। तुम कसम खाये बैठे हो अगर हमे रुलाने की, मन में मान लिया हमने यह वजह तुम्हारे मुस्कुराने की। लो ना है कोई शिकवा और शिकायत अब तुमसे, अब ना रोको खुद को जुदा हुए अब तुम हमसे। लाख कोशिशे कर भी तुम्हें समझा ना सका, तुम्हें खुद का निर्दोष चेहरा भी दिखा ना सका। मुझसे ज्यादा गैरो की बाते तुम सुनते थे, और गुस्से की आग में हर पल हम भुनते थे। ना देनी है कोई सफाई अब हमको, अब ना हम याद तुमको ना तुम याद हमको। बना दिया सरेआम तमाशा मेरा, एक बार भी नही सोचा मैं हु आशिक़ तेरा। लगने लगा था तुमको मैं बोझ बन गया हूं, तुम्हारी आज़ादी का मोल बन गया हूं। इस आज़ादी की कीमत मैंने चुकाई है, तुम्हें रिहा कर मैंने आज फिर मोहब्त निभाई है।। इस आज़ादी को अब तुमसे कोई नही ले सकता, याद रखना मेरे जैसी मोहब्बत कोई तुम्हें दे नही सकता। हो सकता है एहसास तुम्हें भी हो जाये कभी? न होना उदास मैं न रहा होंगे तुम्हारे साथ सभी।। हर कसम वादे से तुमको मैंने आज़ाद कर दिया था, जिस दिन दूसरे से बात का एहसास दिया था।। लो आजा...

अरमाँ

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यूँ तो अरमाँ सभी के हजारों होते है, पर कहाँ पूरे समय से सारे होते हैं। कभी पैसा तो कभी पावर लोगों के ख्वाब होते है, ख्वाबो का क्या है ख्वाब तो बेहिसाब होते है। असली मजा तब है,जो जीवन को जान लेगा? जीवन की हद में खुद को बांध लेगा। हो तुम खुद में खुदा अगर खुद को जान लो, आत्मा को एक बार मन की आंखों से पहचान लो। दिल क़िसी का कभी भूले से भी दुखाना नहीं, भले ही तुम मंदिर में सर कभी झुकाना नही। तुम शिल्प हो तो भोले शिल्पकार है, इस दुनिया में शिव ही सत्य का दरबार है। मैं अभी अरमाँ पाले हजार बैठा हूँ, भोले भंडारी के चमत्कार को बैठा हूँ। शिवम सिंह यादव (अभियंता & अधिवक्ता)