अरमाँ

यूँ तो अरमाँ सभी के हजारों होते है,
पर कहाँ पूरे समय से सारे होते हैं।
कभी पैसा तो कभी पावर लोगों के ख्वाब होते है,
ख्वाबो का क्या है ख्वाब तो बेहिसाब होते है।
असली मजा तब है,जो जीवन को जान लेगा?
जीवन की हद में खुद को बांध लेगा।
हो तुम खुद में खुदा अगर खुद को जान लो,
आत्मा को एक बार मन की आंखों से पहचान लो।
दिल क़िसी का कभी भूले से भी दुखाना नहीं,
भले ही तुम मंदिर में सर कभी झुकाना नही।
तुम शिल्प हो तो भोले शिल्पकार है,
इस दुनिया में शिव ही सत्य का दरबार है।
मैं अभी अरमाँ पाले हजार बैठा हूँ,
भोले भंडारी के चमत्कार को बैठा हूँ।

शिवम सिंह यादव
(अभियंता & अधिवक्ता)


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