मृत्यु

क्या है मृत्यु
आखरी सलाम जन्म को,
आखरी सलाम प्रत्येक को।
सफर खत्म हुआ,दुःख का अन्त हुआ।
बैकुण्ठ के वासी हुए, पृथ्वी से सन्यासी हुए।
ना करो शोक जन्म मृत्यु का, ये बात वासुदेव ने बताई है।
जन्म के साथ मृत्यु ही तो साथ लगकर आई  है।
होता है मुश्किल मन को ये बात समझाना 
मुश्किल - हैं यहां अपनो की मृत्यु को भुला पाना।
समय के साथ जीना सीख लेता है हर कोई,,
किसी को खोता, ताे किसी को पाता है हर कोई ॥
ऊॅ शान्ति
उनकी यादों को समर्पित जो हमारे साथ नही

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