आधुनिकता
आज का दौर आधुनिक हो गया, हर कोई ज्यादा ही प्रायोगिक हो गया। हजारो दोस्त सोशली होते गए, सच्चे साथी जाने कहा खो गए।। चाँद तारो का सपना पाल बैठे है, पैरो से जमीन तक गवाये बैठे है। नया दौर नयी जनरेशन है, बड़ो की सीख भी इनकी टेंशन है। भूल बैठे है ये अपनी खुशिया, बने है सिकंदर और चाहत है सारी दुनिया।। माँ पिता जी का आशीर्वाद अब रोज कौन लेता है? अब सबकी नजरो में मॉडर्न जो बन गया बेटा है। आज का दौर आधुनिक हो गया, हर रिश्ता पैसे से तौला गया। जो जितना पैसा दे सकते है, उनसे उतना गहरा रिश्ते है। बेमतलब की यारी अब इस युग की बात नही, हमसे ये नये युग की दुनियादारी अब बर्दास्त नही। मोबाइल की लत ऐसी लगी है सबको, २ मिनट न मिले तो बीत गए हो बरसो।। ज़िन्दगी में संघर्ष अब लोग कर नही पा रहे, ज़िन्दगी को छोड़ मौत को गले लगा रहे है। आज का दौर आधुनिक हो गया है।।।।। Written by- शिवम् सिंह यादव (अभियंता और अधिवक्ता)