Posts

Showing posts from February, 2020

बीते लम्हे।।

Image
वो भी क्या दिन थे,जब पहला संदेशा तुम्हारा आता था। नव वर्ष हो या हो कोई त्योहार, खास बन जाता था। कुछ भिखरी-भिखरी सी यादें याद आती है, मेरी आंखो को नम बस नम कर जाती हैं। यूं तो हमेशा दोष मेरा ही तुम निकालती रही, मेरे दोष मानने से भी तुम रुठ ही जाती रही। ना हो दोष मेरा फिर भी मै दोषी बन जाता था, तू ना समझी पगली तुझे हद से जादा चाहता था। खत्म किया है तुमने रिश्ता मुझसे गैरो के कहने पे, मजबूर किया है हर लम्हा दोनों को जहर पीने पे। मै टूटे दिल की धड़कन को सुनता नहीं हूं, अब जीवन में कोई ख्वाब बुनता नहीं हूं। बंधा हुआ हूं आज भी अपने वचनों से, नहीं मुक्त हुआ हूं पुरानी कसमो से। करता हूं दुआ आज भी तुम सलामत रहो, मेरी नाकामियों  से दूर तुम खुद में मदमस्त रहो। ना हो तुम्हारे पास एक भी लम्हा मुझे याद करने का, ना हो कोई बुरा एहसास मेरा साथ खोने का। माना गलतियां मै रोज करता था, लेकिन तुम बताओ क्या तुमपे नहीं मरता था? टूटी है कलम आज फिर से दिल की वकालत में, हार गया हूं अपना मुकदमा इस अदालत में।     शिवम सिंह यादव (अभियंता और अधिवक्ता)